हरियाणा में बारिश की कमी और उमस के बीच बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की खबर सामने आई। गर्मी में पंखे और कूलर अधिक चलने से खपत बढ़ती है, जबकि किसान सिंचाई के लिए भी बिजली पर निर्भर रहते हैं। इस स्थिति में आपूर्ति, ट्रांसफार्मर और वितरण व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है।\n\nमांग के आंकड़े केवल बिजली खपत नहीं बताते; वे मौसम, कृषि और घरेलू जरूरतों का संकेत भी देते हैं। विभाग को पहले से लोड का अनुमान, रखरखाव और शिकायत निवारण की व्यवस्था करनी चाहिए।\n\nहरियाणा समाचार बिजली कटौती के स्थानीय असर और विभाग की तैयारी को आंकड़ों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर देखेगा।
बारिश कम होने पर बिजली की मांग क्यों बढ़ जाती है

